होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, माइन्स खतरे से तेल सप्लाई पर संकट
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होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल, यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।
मैग्नेटिक और प्रेशर माइन्स छोटे लेकिन बेहद घातक हथियार हैं, जो जहाजों को अचानक नुकसान पहुंचाकर बड़े समुद्री हादसों का कारण बन सकते हैं।
समुद्री माइन्स हटाना जटिल और समय लेने वाला कार्य है, जिससे तेल सप्लाई बाधित होने और वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है।
US IRAN/ मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच Hormuz Strait एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने इस अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में समुद्री माइन्स बिछाई जाती हैं, तो इसका असर सीधे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
समुद्री माइन्स को आधुनिक युद्ध में एक सस्ता लेकिन बेहद खतरनाक हथियार माना जाता है। विशेष रूप से मैग्नेटिक और प्रेशर माइन्स अत्यधिक घातक होती हैं। मैग्नेटिक माइन्स जहाज के धातु ढांचे को पहचानकर सक्रिय हो जाती हैं, जबकि प्रेशर माइन्स पानी के दबाव में बदलाव से विस्फोट करती हैं। इनकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये पानी के भीतर आसानी से दिखाई नहीं देतीं और अचानक हमला कर सकती हैं।
यदि कोई बड़ा ऑयल टैंकर या मालवाहक जहाज इन माइन्स की चपेट में आता है, तो उसका परिणाम विनाशकारी हो सकता है। विस्फोट से जहाज के निचले हिस्से में बड़ा छेद हो सकता है, जिससे पानी तेजी से भरकर जहाज डूब सकता है। इसके अलावा तेल रिसाव का खतरा भी गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकता है। इंजन और प्रोपेलर के क्षतिग्रस्त होने से जहाज पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है, जिससे अरबों रुपये का नुकसान हो सकता है।
समुद्री माइन्स को हटाना भी बेहद जटिल और जोखिम भरा कार्य है। United States Navy जैसे संगठनों के पास उन्नत तकनीक और प्रशिक्षित गोताखोर हैं, लेकिन संकरे समुद्री मार्ग में ऑपरेशन बेहद धीमा हो जाता है। हजारों माइन्स को निष्क्रिय करने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है, और हर कदम पर विस्फोट का खतरा बना रहता है।
Persian Gulf से होकर गुजरने वाला यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है। यदि यहां किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, सप्लाई चेन में व्यवधान और कई देशों में ईंधन संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इस क्षेत्र में अस्थिरता वैश्विक बाजारों को झटका दे सकती है।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं, जहां किसी भी छोटी घटना का बड़ा वैश्विक प्रभाव हो सकता है।